“ट्रम्प का बयान बना चर्चा का विषय: SCO में भारत-रूस-चीन की साझेदारी से बदलेगा विश्व समीकरण?”


अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हाल ही में एक बड़ा बयान सुर्ख़ियों में है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर भारत, रूस और चीन की एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा:

“लगता है हमने भारत और रूस को चीन के सबसे अंधेरे पक्ष को खो दिया है। आशा है उनका भविष्य लंबा और समृद्ध हो।”

ट्रम्प की यह टिप्पणी भले ही व्यंग्यात्मक हो, लेकिन इसके पीछे की हकीकत बहुत गहरी है। आज भारत, रूस और चीन सिर्फ़ साझेदारी नहीं कर रहे, बल्कि शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे बहुपक्षीय मंचों के ज़रिए नए वैश्विक शक्ति संतुलन की दिशा तय कर रहे हैं।

क्यों बढ़ रही है यह नज़दीकी?

आर्थिक सहयोग: भारत-चीन और रूस की अर्थव्यवस्थाएं मिलकर एशिया को नई ताकत दे रही हैं।

ऊर्जा सुरक्षा: रूस से तेल-गैस की आपूर्ति भारत और चीन दोनों की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करती है।

रणनीतिक तालमेल: SCO में साझा सुरक्षा, आतंकवाद विरोध और व्यापारिक समझौते तीनों देशों को और मज़बूत बना रहे हैं।

अमेरिका की चिंता क्यों?

ट्रम्प का बयान इस बात का संकेत है कि वाशिंगटन को आशंका है — अगर भारत, रूस और चीन एक मज़बूत धुरी बनाते हैं, तो पश्चिमी देशों की रणनीतिक बढ़त कमज़ोर पड़ सकती है।

नतीजा

ट्रम्प की टिप्पणी मज़ाक में कही गई हो, लेकिन यह हकीकत है कि SCO अब एक ऐसा मंच बन रहा है जो वैश्विक राजनीति को नए रूप में ढाल सकता है। भारत, रूस और चीन की साझेदारी भविष्य की भू-राजनीति का सबसे बड़ा गेम-चेंजर साबित हो सकती है।


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