भारत ने बढ़ाया तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर ऐतिहासिक कदम: लॉन्च हुआ पहला स्वदेशी "विक्रम 32-बिट" सेमीकंडक्टर चिप

 


भारत ने तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक छलांग लगाई है। देश का पहला पूरी तरह स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप "विक्रम 32-बिट" लॉन्च कर दिया गया है। यह उपलब्धि भारत की उच्च-स्तरीय तकनीक में बढ़ती ताकत को दर्शाती है और देश को वैश्विक सेमीकंडक्टर पावरहाउस बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

विक्रम 32-बिट: भारत की रणनीतिक स्वायत्तता का प्रतीक

यह अत्याधुनिक माइक्रोप्रोसेसर ISRO के विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर और सेमीकंडक्टर लेबोरेट्री, चंडीगढ़ के संयुक्त प्रयास से विकसित किया गया है। यह सिर्फ एक चिप नहीं, बल्कि भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता का प्रतीक है।

इसे अंतरिक्ष की कठिन परिस्थितियों जैसे – उच्च विकिरण, तापमान में तेजी से बदलाव और कंपन – को सहन करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यही कारण है कि यह चिप भारत के अंतरिक्ष प्रक्षेपण अभियानों और हाई-रिलायबिलिटी एप्लिकेशन में अहम भूमिका निभाएगी।

इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन: 2021 से शुरू हुई नई क्रांति

इस चिप का विकास इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (2021) का सीधा परिणाम है। यह मिशन तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है:

1. मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम – घरेलू स्तर पर मजबूत चिप उत्पादन ढांचा तैयार करना।

2. डिज़ाइन इकोसिस्टम – अत्याधुनिक चिप डिज़ाइन के लिए टैलेंट और वातावरण को बढ़ावा देना।

3. रिसर्च और टैलेंट डेवलपमेंट – भविष्य की सेमीकंडक्टर तकनीक और नवाचार में निवेश।

विदेशी निर्भरता से आत्मनिर्भरता की ओर

काफी समय से ISRO समेत कई संस्थान हाई-एंड कंप्यूटिंग जरूरतों के लिए विदेशी चिप्स पर निर्भर थे। लेकिन विक्रम 32-बिट इस कहानी को बदल देगा। यह न केवल बाहरी स्रोतों पर निर्भरता कम करेगा बल्कि भारत के घरेलू सेमीकंडक्टर उद्योग को भी नई ऊर्जा देगा।

भविष्य की दिशा: "कल्पना सीरीज़" 64-बिट चिप

भारत का रोडमैप साफ और महत्वाकांक्षी है। नए फैब्रिकेशन यूनिट्स बनाने, डिज़ाइन-फोकस्ड स्टार्टअप्स को फंडिंग देने और और भी एडवांस्ड प्रोसेसर विकसित करने की तैयारी है। आने वाले समय में "कल्पना सीरीज़" 64-बिट चिप सैटेलाइट एप्लिकेशन के लिए लॉन्च की जाएगी।

आर्थिक और तकनीकी लाभ

भारत हर साल 25 बिलियन डॉलर से ज्यादा सेमीकंडक्टर आयात पर खर्च करता है। ऐसे में स्वदेशी चिप निर्माण न केवल अरबों डॉलर बचाएगा, बल्कि नए रोजगार भी पैदा करेगा। इसका सीधा असर इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) और 5G जैसे क्षेत्रों पर पड़ेगा।

निष्कर्ष

हालाँकि भारत को अभी वैश्विक दिग्गजों से मुकाबला करने के लिए लंबा रास्ता तय करना है, लेकिन "विक्रम 32-बिट" पहला मजबूत कदम है। यह संदेश दुनिया को देता है कि भारत अब अपनी तकनीकी नियति खुद गढ़ने के लिए तैयार है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ